Sunday, August 16, 2009

बिटिया/ BITIYA



एक गुडिया के कच्चे रुई के फाहे सी है बिटिया
कभी उछ्लकर कभी बिदककर आटे की चिडिया है बिटिया
नन्हे पावों की धीमी थाप है बिटिया
सर्दी में गर्म रोटी की भाप है बिटिया
बिटिया पावन गंगाजल है
बिटिया मुस्कुराती एक ग़ज़ल है 
चूडियों की खनक , पायलों की झंकार है बिटिया
झरने की मद्दम फुहार है बिटिया
कभी धुप कभी छाव कभी बरसात है बिटिया
गर्मी में पहली बारिश की सौगात है बिटिया
चिडियों की चहचाहट कोयल की कूक है बिटिया
हो जिसमे सबका भला वो प्यारा सा झूठ है बिटिया
और किसी मुश्किल खेल में मिलने वाली जीत है बिटिया

दिल को छु जाए वो मधुर गीत है बिटिया
माँ की एक पुकार है बिटिया
मुस्काता एक त्यौहार है बिटिया
सच बोलूं तो बिटिया पीडा की गहरी घाटी है
क्या किसी ने उसकी पीडा रत्ती भर भी बांटी है
अरमानो के काले जंगल उसको रोज जागाते हैं
हम, बिटिया कैसी हो कह कर चुप चाप सो जाते हैं
हर दुःख को हंसते हंसते बिन बोले सह लेती है
पूरे घर में खुशी बिखेरे बिटिया दुःख में रह लेती है

ek gudiya ke kachche rui ke faahe si hai bitiya
kabhi uchal kar kabhi bidak kar aate ki chidiya hai bitiya
nanhe paaon ki dhimi thaap hai bitiya
sardi mein garm roti ki thaap hai bitiya
bitiya pawan gangajal hai
bitiya muskurati ek gazal hai
chudiyon ki khanak, payalon ki jhankar hai bitiya
jharne ki maddam fuhaar hai bitiya
kabhi dhoop kabhi chaanw kabhi barsaat hai bitiya 
garmi mein pahli barish ki saugaat hai bitiya
chidiyon ki chahchahat koyalon ki koohk hai bitiya
ho jismein sabka bhala vo pyarasa jhooth hai bitiya
aur kisi musqil khel mein milne wali jeet hai bitiya
dil ko choo jaaye vo madhur geet hai bitiya
maa  ki ek pukaar hai  bitiya
muskaata ek tyohaar hai  bitiya
sach boloon toh bitiya peeda ki gahri ghaati hai
kya kisi ne uski peeda ratti bhar bhi baati hai
armaano ke kaale jangal usko roj jagaate hain
hum, bitiya kaisi ho kah kar chupchaap so jaate hain
har dukh ko haste haste  bin bole sah leti hai
poore ghar mein khusi bikhere bitiya dukh mein rah leti hai 

NEERAJ PAL 






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