Wednesday, May 28, 2014

तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी


तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी 
माँ रोई और बहना रोई, रोई खुदाई थी 
तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी  

माँ बोली मेरा एक लाल था जिसने प्राण गवाएं 
इश्वर ने क्यों मुझको ना सौ सौ लाल जनाए 
देश सुरक्षा के खातिर सबको सरहद भिजवाती 
सौ शहीदों वालों माँ मै बड़े गर्व से कहाती 
फफक- फफक कर रोई माँ, रो रो बौराई थी 

तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी 
माँ रोई और बहना रोई, रोई खुदाई थी 
तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी  


बहना बोली भाई ने मेरे मेरा मान बढाया 
रक्षा बंधन के सूत्र वाक्य को जीवन में अपनाया 
मेरा भाई वीर था उसने वीरगति को पाया 
देश सुरक्षा के खातिर- 
हाँ देश सुरक्षा के खातिर अपनी जान गंवाई 
ये कहते ही उसने भी सुध-बुध गंवाई थी 


तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी 
माँ रोई और बहना रोई, रोई खुदाई थी 
तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी  

शहीद हो गया लाल ये मेरे बुढ़ापे का सहारा 
कर रहा गर्व मेरे लाल पे पूरा देश हमारा 
सेना में भर्ती होने का सपना मैंने दिखलाया 
देश सुरक्षा सर्वोपरि है पाठ ये मैंने पढ़ाया 
हम सबकी रक्षा के खातिर सबकुछ उसने लुटाया 
इतना कहते ही उसकी फिर आँखें भर आयीं थीं 

तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी 
माँ रोई और बहना रोई, रोई खुदाई थी 
तिरंगे में उसकी मिटटी घर जो आयी थी

Wednesday, August 21, 2013

मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ

खुद से जीतने की जिद है, मुझे खुद को ही हराना है 
मै भीड़ नहीं हूँ दुनिया की, मेरे अन्दर एक ज़माना है

मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 
डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
अजीब हाल है इस दुनियादारी का 
ये सारे हाल तेरे हाल पर ही छोड़ता हूँ 

डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 
डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 

टूटने दो टूटने के बाद ही तो कुछ बनेगा 
छूटने दो छूटने के बाद ही तो वो मिलेगा 
एक परिंदा है अभी जिंदा मुझमें कहीं थोडा बहुत 
उड़ने दो उड़ने के बाद ही तो वो कहेगा 

मै मलंग, बनके पतंग 
अपने फलक को चूमता हूँ 

डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 
डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 

अजीब हाल है इस दुनियादारी का 
ये सारे हाल तेरे हाल पर ही छोड़ता हूँ 


चाहता हूँ  मै भी उड़ना और तैरना 
चाहता हूँ  मै भी नाचूँ बनके झरना 
तोड़ दूं जंजीर जिनसे मै बंधा हूँ 
चाहता हूँ लिख दूं हवा पे नाम अपना 

चाहता हूँ इस कदर,
इसी चाह में मै झूमता हूँ 

डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 
डूबता हूँ, डूबता हूँ, डूबता हूँ 
मै खुद में खुदा को ढूंढता हूँ 

अजीब हाल है इस दुनियादारी का 
ये सारे हाल तेरे हाल पर ही छोड़ता हूँ 

Wednesday, May 8, 2013

संघर्ष का दूजा नाम ही तो जवानी है.












मुखौटों ने अपनी शक्लें पहचानी हैं
इसीलिए तो आईने से आनाकानी है. 

परछाईं भी घटती बढती है पल पल 

खुद के दम पर नैया पार लगानी है. 

अंधियारे की रात भयानक आई है 

जुगुनुओं की बरात हमें अब लानी है.

संविधान के खातिर खाकी खादी ने 

जो खायी थी कसमें याद दिलानी हैं.

टूटो-छूटो फिर से संवरो और डट जाओ 

संघर्ष का दूजा नाम ही तो जवानी है. 


रचना काल: 9/05/2013


Monday, April 15, 2013

गोपू का फेस्बुकिया इश्क


हमारे मोहल्ले के टशनी मित्र गोपेश्वर प्रसाद त्रिपाठी उर्फ़ गोपू। ये उनका उर्फ़ वाला नाम हम दोस्तों की देन है। वैसे गोपू भाई शुरवात में  मतलब जब हम लोगों की संगती में आये थे तब वो टशनी वशनी तो बिलकुल नहीं थे. एक सीधे सच्चे बच्चे थे। फिर बातों के साथ गलियों का ऐसा मिश्रण हुआ की मानो शरबत में नींबू नीचोड़ कर दे दिया हो किसी ने। वैसे बीप बीप वाली जुबान के मालिक गोपू आज कल दूसरी ही भाषा बोल रहे हैं। जैसे हँसते हैं तो कहते हैं लोल, कुछ बुरा लग जाए तो बोलते हैं  व्हाट द ऍफ़, और ज़्यादातर तो अपने टशनी फ़ोन के साथ ही लगे रहते हैं। हम दोस्तों से ज्यादा वो उन दोस्तों से बातें करते हैं। खैर अपन को कोई शिकायत नहीं, अपन तो फ़क्कड़ी आदमी हैं, दोस्त को अपन ने वहां भी पकड़ लिया। पर साला अब अबे की जगह हाय बोलना पड़ता है। खैर गोपू से फेस टू फेस न सही फेसबुक पर तो मुलाक़ात हो ही जाती है। 

हफ्ते में कभी कभार नहाने वाले गोपू फेसबुक में अपनी चमचमाती हुई प्रोफाइल फोटो और गूगल से उठाई गयी प्यार वाली कविताओं के लिए जाने जाते हैं। यह कार्य ये नियमित रूप से कर रहे है। वैसे एक काम और है जो ये बिना किसी देरी के करते हैं वो है लड़की की प्रोफाइल दिखी नही की इनका फ्रेंड रिक्वेस्ट का पहुंचना। वैसे उनकी कोशिस थोड़ी बहुत कामयाब भी हुई कुछ फ्रेंड रिक्वेस्ट एक्सेप्ट भी हुई और बहुत सारी रिजेक्ट। खैर आशावादी गोपू ने रिजेक्शन को भूल एक्सेप्टेंस की ख़ुशी मनाई और अपने वाल पर चिपका दी किसी घटिया कवि की घटिया सी लाइन " बधाई हो दोस्तों हम हो गए आज हज़ार, बस इसी तरह से मिलता रहे आपका हर दिन प्यार" ।  प्यार से याद आया की अपनी 'गोप्स द डूड' के नाम से बनायीं गयी प्रोफाइल जुडी न जाने कितनी फेक आई डी वाली लड़कियों से और  न जाने कितनी बार प्यार कर बैठे थे हमारे मोहल्ले के टशनी मित्र गोपेश्वर प्रसाद त्रिपाठी उर्फ़ गोपू। हज़ारों बार दिल टूटा और लाखों बार खुद को संभाला, आखिर कार सोशल मीडिया पर होने का फायदा उन्हें मिलता हुआ दिखाई पड़ा। वो अब हर घंटे की अपडेट लिख देते हैं दिल का सिम्बल बना कर। इश्क वाला लव हुआ था या लव वाला इश्क पता ही नहीं चला।  ये अपना गोपू ही था जो की ऐसी ऐसी फोटो पर वहां नज़र आ रहा था या फिर कोई और। अभी तक फेस टू फेस न मिला गोपू फेसबुक पर इश्क के इज़हार को अपना संसार मान रहा था। 
इसका एक तो फर्क पड़ा, अब वो पुरा
ना वाला गोपू वापस मिल गया जो की हमसे पहली बार मिलने आया था। मतलब बिना गाली वाला सीधा बच्चा, इश्क जो न कराये वो कम। 

वैसे उस प्यार के चक्कर में उसने शहर के न जाने कितने और कहाँ कहाँ चक्कर लगाये, ऐसा लग रहा था कोई टीचर किसी बिगडैल बच्चे को जानबूझ कर ऐसा टास्क दे रहा है जिससे उसका ज्ञान भी बड़े और सजा भी मिले। पर यहाँ तो न कोई टीचर था और न ही कोई स्टूडेंट, यहाँ था तो ट्शनी की चाशनी से बहार आ चूका गोपू और उसका अनदेखा, अंजना (एकौर्डिंग टू हिम फेसबुक पर मिला और जाना पहचाना) प्यार। खैर अपनी ही दुनिया में मस्त गोपू मोबाइल और लैपटॉप से चिपका रहने वाला वो लड़का अब एक मीटिंग ही चाहता था, पर ये उसकी चाहत थी, हर चाहत हकीकत हो ये जरूरी तो नहीं। वैसे इतना सब होते हुए भी उसने किसी को कुछ नहीं बताया, पर एक दिन जब उससे नहीं रहा गया तो मुझसे बोलने लगा " यार नीरज ये बताओ की किसी को बिना देखे बिना मिले, या फिर केवल फेसबुक ( ये शब्द उसके मुह से अचानक निकल गया) पर मिले प्यार हो सकता है क्या?" मैंने कहाँ यार ये तो अपनी अपनी सोंच है वैसे के बार मिलकर ही फैसला लेना चाहिए दोस्त नहीं तो दिल टूटता है और उसकी आवाज़ तक नहीं आती है। 

शायद उसको ये बात कुछ जमी, और उसने उस पर मिलने के लिए खूब जोर डाला, और मीटिंग फिक्स हुई वो बड़ा बनठन के मिलने पहुंचा हाथों में गुलाब, आँखों में महंगा सा चश्मा अच्छी सी शर्ट पेंट और बेहद कीमती पर्फियुम से नहाकर। थोड़ी देर इंतज़ार के बाद उसको बताये हुए रंग (पिंक) की शर्ट और जीन्स में एक लड़की नुमा लड़का पहुंचा, उसे यकीन नहीं हुआ,  उस वक्त उसे लगा की  जो उसकी सोंच है वही सही है  ये जो नज़र आ रहा है ये भ्रम है इसी लिए उसने मुस्कुराकर वेलकम करते हुए जब अपन हाथ बढाया तो उसका अहसास भी उसकी सोंच की तरह ही कोमल था। मगर कहते हैं की जब सच का झोंका चलता है तो झूठ के सारे महल ढ़ह जाते हैं। वही हुआ जैसे ही उसने मुह खोला  गोपेश्वर प्रसाद त्रिपाठी उर्फ़ गोपू का सारा भ्रम फुर्र हो गया। फिर क्या था वो वहां से ऐसे भाग जैसे वहां आया ही न हो। 

वैसे सुना है की फेसबुक पर प्यार तो नहीं मिला पर फेसबुक से उसका प्यार अभी भी बरकरार है। लोग तो कहते हैं गोपू की खोज जारी है और उसकी लड़कियों को फ्रेंड रिक्वेस्ट सेंडिंग भी जारी है। 

Friday, February 1, 2013

जंगल में गूंजी सिसकी

भरी दुपहरी 

खुली मशहरी 

मच्छर करते गुन गुन गुन

 
चिड़ियाँ दाना चुगना भूलीं 


करतीं रह गयीं, चूं चूं चूं 


लार बहाते, कुत्ते भौंकें

 
जंगल देखे जंगल चौंके

 
हड्डी नोंचें चिड़िया की 


जंगल में गूंजी सिसकी 


उसकी सिसकी गूंगी थी

 
या जंगल की दुनिया बहरी थी

 
देख चिरैया की हालत 


खौफ जंगल में फ़ैल गया 


और कुत्तों की जुबानों ने 


एक नए गोश्त का स्वाद चखा 


और इधर जंगल में सारे शेर शर्मिंदा हैं 


जंगल में आज भी वहशी कुत्ते जिंदा हैं

Friday, December 14, 2012

मेरी चाह


मुझे सूरज नहीं बनना है

वो तो रोज डूबता है

मुझे चाँद भी नहीं होना

आधा माह गर्दिश में ही रहता है

मुझे तारा भी नहीं बनना

भीड़ में दिखते हैं हमेशा

मुझे हवा भी नहीं बनना

कोई शक्ल नहीं है उसकी

अगर हो सके तो मुझे

किसी बच्चे के चेहरे की मुस्कान बना दो

या फिर तपती धुप में

मजदूर पर पड़ती हुई एक छाँव बना दो


    Wednesday, November 28, 2012

    कुछ तो छोड़ो नेता जी..


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    दाल गटक गए, भात गटक गए 
    लोगों की औकाद गटक गए 
    कोयला, चारा, तेल गटक गए 
    स्टाम्प वाला खेल गटक गए 
    वादे कुर्सी वोट गटक गए 
    काले वाले नोट गटक गए 

    अब तो बक्शो नेता जी 
    देश पर तरसो नेता जी 


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    बिजली पानी सुधार गटक गए 
    मुआबजा-ऐ- बीमार गटक गए 
    बनी बनाई सड़क गटक गए 
    नदी नाले नहर गटक गए 
    नन्ही मुन्ही किताब गटक गए 
    सुनहरे कल के ख्वाब गटक गए 

    अब तो डकारो नेता जी 
    स्वर्ग सिधारो नेता जी 


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    गज़ब हाजमा लाये हो 
    क्या क्या गुरु पचाए हो 
    धर्म और ईमान पचा गए 
    राम और रहमान पचा गए 
    बापू वाली खादी पचा गए 
    देश की आजादी पचा गए 

    कब तक पचेगा नेता जी 
    पेट फटेगा नेता जी 


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    अब तो बक्शो नेता जी 
    देश पर तरसो नेता जी 


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    अब तो डकारो नेता जी 
    स्वर्ग सिधारो नेता जी 


    कुछ तो छोड़ो  नेता जी 
    मुंह तो मोड़ो नेता जी 

    Wednesday, October 17, 2012

    हरियाणा में 4 प्लेट चाउमीन के साथ 4 लड़के पकडे गए.




    हिन्दुस्तान में न जाने कितने तालिबान हैं.. हमारे यहाँ नौकरों से ज्यादा तो मालिक हैं.. यहाँ धर्मों के मालिक हैं. अधर्मों के मालिक हैं. गुंडों के मालिक हैं. हैं नेताओं के मालिक हैं. दबंगों के मालिक हैं. अपंगों के मालिक हैं. और इन सबका तो भगवान् ही मालिक है. वैसे भगवान् भी धरती पर इन लोगों के फुल कंट्रोल में रहते हैं. जैसा अरमान इनके दिल में आया वैसा फरमान इन्होने सुनाया. अब आप मानो या  मानो.. उसे सुन कर हंसो.. या फिर मान कर उसमें फंसो ... ये तो आपकी मर्जी है. यहाँ फेसबुक में और इंटरनेट में बैठकर उनके खिलाफ लिखना और उसपर रिएक्ट करना आसान है. पर उनका क्या होगा. जो वहां रह रहे हैं.. बेचारे कल से चाऊमीन नहीं खा पाएंगे. 

    खाप के माई-बापों ने छुरी कांटे से चाऊमीन खाते खाते हार मान ली होगी. बड़े बड़े नेता  जिनके सामने वोटों के लिए सर झुकाते हों वो चाऊमीन के लिए अपना सर झुका और नाक कटायें तो कैसे. छोटे छोटे लड़के उनके  सामने चम्मच से ही चाऊमीन को सफाचट कर जाते हैं. वो बेचारे देखते रह जाते हैं.. तब उनको बचपन की बात याद आती है. " न खेलेंगे ... न खेलने देंगे." और फिर बुलाई जाती है सम्मान के लिए एक बैठक. फैसला लिया जाता है की चाऊमीन का बहिस्कार होना चाहिए. बिना कारन बहिस्कार तो बनता नहीं.. जो मामला गरम  हो उससे जुड़े आरोप लगा देते  हैं उसपर. 
    मुझे तो लगा था की जमीन घोटाले या फिर अपंगों या फिर कोयले से जुड़े घोटाले का आरोप जड़ कर चाऊमीन का बहिस्कार करेंगे.. खैर उन्होंने चाऊमीन पर जो आरोप जड़ा है वो तो चाऊमीन को सौस दिखाने लायक नहीं छोड़ा. 

    मेरे हिसाब से खापों की सीमा सीमित है मगर जुर्रत असीमित.  खापों के बापों की भी हिम्मत नहीं की उनका कुछ बिगाड़ सकें. 

    Tuesday, July 17, 2012

    हिन्दुस्तान में तालिबान

    यहाँ धर्म शोर मचाता है 

    सम्प्रदाय चिल्लाता है 

    जातियां बोलती हैं 


    लोग सुनते हैं 


    यहाँ ये सब जिंदा हैं 


                        और शायद कुछ दम तोड़ते इंसान है 



                         मेरे हिन्दुस्तान में कई तालिबान हैं

    Thursday, May 24, 2012

    छूटी है जब आस ,तो फिर बात क्या करें ...


    है सब ड्रामेबाज़
    हैं सब गूंगे साज़ 
    हैं खूद में उस्ताद 
    है पैसे की बकवास 

    छूटी है जब आस ,तो फिर बात क्या करें 
    झूठे अश्कों का, अहसास क्या  करें 
    किस्से और कहानियों में बाकी है बचा 
    जग में मिटा है विश्वास क्या करें 
    उलटे सीधे रस्तों पे क्यों न जाऊं मै
    मुट्ठी में सूरज  रखूँ, चंदा पाऊँ मै 
    तलवारों पे चलने का सुकून जो मिले 
    खून भी बहाकर अपना हिस्सा पाऊँ मै 

    अब होगा आगाज़ 
    बजेंगे सारे साज़ 
    है दिल की ये आवाज़ 
    दुनिया जानेगी आज 

    Sunday, May 13, 2012

    माँ मम्मी अम्मा

    जिद्दी बने तो कारण तुम हो

    जीते तो भी कारण तुम हो

    गम से ख़ुशी का कारण तुम हो

    मेरे होने का कारण तुम हो

    अधिकार भी तुम ज़िम्मा भी तुम

    माँ मम्मी अम्मा भी तुम

    हैप्पी मदर्स डे

    Thursday, April 19, 2012

    है मुर्दा मस्त कलंदर तू ...



    है मुर्दा मस्त कलंदर तू

    क्यों बोझ का पौधा सींच रहा

    है मन का अपने सिकंदर तू
     
    क्यों मन में पाला खींच रहा

    जब हवा चले तो बहने दो

    जब हूक उठे तो कहने दे

    खामोश है दिल चुप रहने दो

    क्यों उलटे पाँव को चूम रहा


    है मुर्दा मस्त कलंदर तू

    क्यों बोझ का पौधा सींच रहा

    है मन का अपने सिकंदर तू

    क्यों मन में पाला खींच रहा

    क्यों धीरे धीरे मरता है

    क्यों हवा पर पाँव धरता है

    क्यों आईने से डरता है

    तू किस दुनिया में झूम रहा

    है मुर्दा मस्त कलंदर तू

    क्यों बोझ का पौधा सींच रहा

    है मन का अपने सिकंदर तू

    क्यों मन में पाला खींच रहा
                                     Neeraj Pal

    Friday, April 6, 2012

    फिर जिंदा हो ....


    इस  किस्तों वाली मौत को 
    एकमुश्त मौत दे दो 
    फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
    एक नयी जिंदगी लो
    एक सही जिंदगी लो 
    फिर जिंदा हो 
    फिर जिंदा हो 

    क्या खूब मुखौटा पहने है 
    क्या खुद पर पर्दा डाला है 
    है चमकती पट्टी आँखों पर
    समझे खुद को निराला है 
    ये झूठ के  परों को कतरों ज़रा 
    फिर छूना सच के आकाश को 
    अब छोडो, दुनिया के खौफ को 
    इस  किस्तों वाली मौत को 
    एकमुश्त मौत दे दो 
    फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
    एक नयी जिंदगी लो
    एक सही जिंदगी लो 
    फिर जिंदा हो 
    फिर जिंदा हो 

    मन में रखे आईने को 
    सही सूरत दे दो, जीने को 
    देख दूजों की चकाचौंध 
    क्यों खुद पर शरमाते हो 
    इस उतरन को उतार फेकों 
    फिर अपनी असल चमक देखो 
    क्यों गीले कोयले से सुलगते हो 
    इस  किस्तों वाली मौत को 
    एकमुश्त मौत दे दो 
    फिर खुशियों वाले ब्याज पर 
    एक नयी जिंदगी लो
    एक सही जिंदगी लो 
    फिर जिंदा हो 
    फिर जिंदा हो 

    Monday, March 12, 2012

    परछाई के खातिर कब तक.... सूरज को पीठ दिखाऊंगा


    मजबूरी की मंजूरी है या

    मंजूरी की मजबूरी है

    ख्वाबों की हकीक़त से

    ये जाने कैसी दूरी है

    टूटा- चिटका सच बेहतर है

    उजले उजले धोखे से

    कुछ मौके पर तुम मुकरे हो

    कुछ मौकों पर गलत थे हम

    धुंआ धुंआ फैले थे तुम

    हवा हवा संवरे थे हम

    अब खुद को कितना मौका दूंगा

    कितना मै समझाऊंगा

    परछाई के खातिर कब तक

    सूरज को पीठ दिखाऊंगा

    ये जिंदगी की दौड़ है

    यहाँ हारना भी जरूरी था

    यहाँ जीतना भी जरूरी है

    मजबूरी की मंजूरी है या

    मंजूरी की मजबूरी है

    ख्वाबों की हकीक़त से

    ये जाने कैसी दूरी है

    Monday, December 5, 2011

    CHIRKUTIYE CHIRKUTIYE CHIRKUTIYE ...


    chirkutiye chirkutiye chirkutiye
    we are chirkutiye

    sometimes orkutiye
    sometimes tiweeter
    for the business linkedin
    but facebook is better
    better world creater

    chirkutiye chirkutiye chirkutiye
    we are chirkutiye

    KG liter senti meter 
    all units for shopkeeper
    money minded
    human ended
    harm to nature
    black future

    chirkutiye chirkutiye chirkutiye
    we are chirkutiye

    masti khori, thodi thodi 
    matan chiken, large pag
    heqtik day, night pack
    client roaring. boss shouting
    ready meetin, night shifting
    family crying
    we still trying

    chirkutiye chirkutiye chirkutiye
    we are chirkutiye

    loud speaker, white kurta
    door to door ghoomta firta
    5 yearvo raj karta 
    our face slap karta
    black money se pocket bharta 
    common man  bas rota rahta  

    chirkutiye chirkutiye chirkutiye
    we are chirkutiye

    Thursday, July 28, 2011

    सच्चाई या सपना/ sachchayee ya sapna


    वो सबसे प्यारा सपना है 
    धूप में चांदनी बरसाता है 
    साँसों पर है उसकी हुकूमत 
    सच होने को तरसाता है 
    अब नींद गुमशुदा नयनो से 
    पलक झपकते ले जाता है 
    पुष्पों की दीवारों
    मखमल की छत का बना हुआ
    वो घर नहीं एक मंजिल है शायद 
    या किसी फक्कड़ी सिकंदर की आरामगाह 
    कुछ तो खिचाव है उसमें 
    नहीं तो मै कहाँ 
    और मेरा सपना कहाँ 
    सपने कुछ ना कुछ हकीक़त के लिबास में आते हैं 
    तभी तो फूलों से बनी वो दिवार जो बहुत कमजोर थी 
    गिरने के लिए बेताब है 
    और मुझे मखमल से उतना ही डर है
    एक झोके में सब बिखर तो नहीं जायेगा 
    हाय ये क्या हो जायेगा 
    डर रहा हूँ अब तलक 
    सच्चाई से या सपने से 
    ये नहीं मालूम

    vo sabse pyara sapna hai
    dhoop mein chandni barsata hai
    saanson mein hai uski huqumat
    sach hone ko tarsata hai
    ab neend gumshuda nayanon se
    palak jhapakte hi le jaata hai
    pushp ki diwaaron
    makhmal ki chat ka bana hua
    vo ghar nahi, ek manzil hai shayad
    ya kisi fakkadi ki araamgah
    kuch toh khichaw hai usmein
    nahi toh mai kaha aur mera sapna kahan
    sapne kuch na kuch haqiqat ke libas mein aate hain
    tabhi toh foolon se bani vo diwar jo bahut kamjor thi
    girne ke liye betaab hai
    aur mujhe makhmal se dar hai ki
    ek jhoke mein sab bikhar toh nahi jayega
    hay ye kya ho jayega
    dar raha hoon ab talak
    sachchayee se ya sapne se
    ye nahi maloom




    Thursday, June 23, 2011

    पर सच तो ये है/ par sach toh ye hai

    मुझे मालूम है 
    तेरी सांसो की खनक में नाम मेरा शामिल है 
    तेरे अश्को में दिखता है मेरा ही चेहरा 

    तुझे भी पता है 
     कि दिल में तेरे नाम की चहल कदमी है 
    ख्वाब मेरे हैं मगर तेरे सिवा कोई दिखता ही नहीं 

    क्या करें 
    कि जब मिलना मुमकिन ही नहीं 
    और जिंदा रहने का कोई और बहाना मिलता ही नहीं 

                                               कितने मजबूर हैं हम 
                                               पर सच तो ये है 
                                               एक दूजे से कहाँ दूर हैं हम 


    mujhe maloom hai
    teri saanson ki khanak mein naam mera shamil hai
    tere ashqon mein dikhta hai mera hi chehra


    tujhe bhi pata hai
    ki dil mein tere naam ki hi chahal qadmi hai
    khawab mere hain magar tere siwa koi dikhta hi nahi
    kya karein jab milna mumqin hi nahi aur 
    zinda rahne ka koi bahana hi nahi


    kitne mazboor hain hum 
    par sach toh ye hai ki
    ek dooje se kahan door hain hum

    Tuesday, March 29, 2011

    तू तेज़ चल/ tu tez chal


    है काली रात 
    है खाली रात 
    है बुझती आग 
    तू खुद में झाँक 
    तू खुद को आँक
    यही वक़्त है 
    ज़रा सख्त है 
    तू तेज़ चल 
    तू बढता चल 
    तू जी ले आज 
    तेरा होगा कल 
    तू तेज़ चल 
    ज़रा तेज़ चल 
    न पीछे देख 
    न नीचे देख 
    न रंग बदल
    न ढंग बदल 
    कोई सपना बुन 
    नच  अपनी धुन 
    तू आज जाग 
    गा अपना राग 
    तू तेज़ चल 
    तू बढता चल 
    तू जी ले आज 
    तेरा होगा कल 
    तू तेज़ चल 
    ज़रा तेज़ चल 
    न टूट कर 
    न रूठ कर 
    न बिखर कर 
    न उखड कर 
    मन को पकड़ 
    तो बढ़ता चल 
    तू तेज़ चल 
    तू बढता चल 
    तू जी ले आज 
    तेरा होगा कल 
    तू तेज़ चल 
    ज़रा तेज़ चल 
    तू इतना तन 
    तू फलक बन 
    तू धूप बन 
    तू छाँव बन 
    तू नदी बन 
    तू नाव बन 
    पर ध्यान रख 
    न लगे दाग 
    तू तेज़ चल 
    तू बढता चल 
    तू जी ले आज 
    तेरा होगा कल 
    तू तेज़ चल 
    ज़रा तेज़ चल 


    hai kaali raat 
    hai khali raat 
    hai bhujhti aag 
    tu khud mein jhaank
    tu tez chal 
    tu badta chal 
    tu jee le aaj 
    tera hoga kal
    tu tez chal
    zara tez chal
    naa peech dekh
    na neeche dekh 
    na rang badal 
    na dhang badal
    koi sapna bun
    nach apni dhun
    tu aaj jaag
    gaa apna raag


    tu tez chal 
    tu badta chal 
    tu jee le aaj 
    tera hoga kal
    tu tez chal
    zara tez chal
    na toot kar
    na rooth kar
    na bikhar kar
    na ukhad kar
    man ko pakad
    tu badta chal


    tu tez chal 
    tu badta chal 
    tu jee le aaj 
    tera hoga kal
    tu tez chal
    zara tez chal
    tu itna ban
    tu falak ban
    tu nadi ban
    tu naav ban
    par dhayaan rakh
    na lage daag


    tu tez chal 
    tu badta chal 
    tu jee le aaj 
    tera hoga kal
    tu tez chal
    zara tez chal